एक दाण की बात हे। ऊन्दरो तेनालीराम का घरे घणी धामा चोकड़ी मचा मेली। वो बापड़ो घणो दुकी हो, वो ईं दुक मूँ छूटकारो पाबा का बाते सला लेबा का बाते वो वींका दोस्त नके ग्यो। दोस्त वींने एक मनकी पाळबा की सला दीदी। तो तेनालीराम एक मनकी पाळ लीदी, जीं दनऊँ मनकी पाळी वीं दन मूँ वींका ऊटे ऊन्दरा बी कम वेग्या। वो बापड़ो होरो वेग्यो, अणाचेत की एक दन वींकी मनकी एक पड़ोसी का घर मे एक हूड़ो मार नाक्यो। भड़लो मनक तेनालीराम की मनकी के बातें दोड़्यो अन विने पकड़ लीदी। तेनालीराम क्यो के में या मनकी ऊन्दरा का दुकऊँ पाळी, मने माप कर अन मारी मनकी पाछी देदे। पड़ोसी बोल्यो के मूँ खुद ऊन्दरा पकड़ सकूँ, थूँ या मनकी काँ पाळी। पड़ोसी वींने मनकी ने दीदी अन वो मनकी ने काँकड़ मे छोडन आग्यो। थोड़ाक दना केड़े पड़ोसी वाळा मनक ने कुई मनक एक पेटी ईनाम मे दीदी। वो मनक वीं पेटी ने हुवे जीं घर में लेजान खोली, पेटी खोलताई वींमूँ ऊन्दराई-ऊन्दरा निकळ्या अन कूद-कूदन बान्ने पड़ग्या। ऊन्दरा घर मे च्यारूँ मेर दोड़बा लागग्या। वो अन वींको नोकर वाँ ऊन्दरा ने पकड़बा का बाते खूब दोड़्या पण वींके एक बी ऊन्दरो हात में ने आयो। वीं दाण वीं मनक के घणो नंगसाण व्यो। थाँकन पछे वीं पेटी मे देकबा लागो के ईं पेटी मे अस्यो कई हे, अन या पेटी कुण खन्दई। वीं पेटी मे एक चिट्टी लिकी तकी ही, वीं में लिक्यो तको हो के थाँ तो क्यो के बना मनकी ऊन्दरा ने पकड़बा को सादन हे। मूँ पकड़बा के बाते थोड़ाक ऊन्दरा थाँका अटे मेल रयूँ, थाँको तेनालीराम। तेनालीराम को नाम भणतई वीं मनक ने नंगे पड़गी, वींने हारी बात हमज में आगी। वीं जट वींकी भूल ने हूदारबा का बाते तेनालीराम मूँ मापी मांगी अन वा मनकी पाछी दे दीदी।
 

परसण -

1. तेलानी राम कींका दुकऊँ वीं कई पाळी?
2. ऊन्दरा पकड़बा वाळी मनकी पड़ोसी के घर में कई नंगसाण किदो हो?
3. ऊन्दरा की भरी तकी पेटी कुण खन्दई अन परची में कई लिक्यो तको हो?

    ईं केणीऊँ भणबा वाळा मनकाँ ने कई अकल मले लिको–